भारत में अगर कोई पूछे कि “हमारे देश में ज्वालामुखी कहाँ है?”, तो जवाब होगा – बैरन द्वीप, जो अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में स्थित है। यह भारत ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है। इस लेख में हम जानेंगे कि बैरन द्वीप क्या है, यह कैसे बना, यहाँ क्या-क्या होता है, और क्यों यह वैज्ञानिकों के लिए इतना खास है।
बैरन द्वीप कहाँ स्थित है?
बैरन द्वीप भारत में स्थित एक सक्रिय ज्वालामुखी है, जो अंडमान सागर में आता है। यह पोर्ट ब्लेयर से लगभग 140 किलोमीटर उत्तर-पूर्व दिशा में स्थित है। यह द्वीप पूरी तरह से निर्जन है यानी यहाँ कोई इंसान नहीं रहता। इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 8.34 वर्ग किलोमीटर है और ऊँचाई समुद्र तल से 354 मीटर तक जाती है।
बैरन द्वीप का नाम “बैरन” क्यों है?
“बैरन” शब्द का मतलब होता है बंजर या खाली जगह, जहाँ कोई जीवन नहीं होता। इस द्वीप पर कोई इंसान नहीं रहता, इसलिए इसका नाम बैरन पड़ा। यहाँ सिर्फ कुछ पक्षी, बकरियाँ और जंगली जीव पाए जाते हैं।
बैरन द्वीप भारत में स्थित एक सक्रिय ज्वालामुखी है – यह कैसे बना?
यह ज्वालामुखी टेक्टोनिक प्लेट्स के टकराव से बना है। भारत की प्लेट और बर्मा की प्लेट जब एक-दूसरे से टकराती हैं, तो पृथ्वी के अंदर का मैग्मा ऊपर की तरफ दबाव बनाता है। यही मैग्मा जब बाहर आता है, तो ज्वालामुखी फटता है।

यह द्वीप एक Stratovolcano है, जिसमें pyroclastic cones भी हैं। इसका मतलब है कि यह ज्वालामुखी कई बार फट चुका है और हर बार लावा, राख और धुआं बाहर निकला है।
बैरन द्वीप पर पहला विस्फोट कब हुआ?
इतिहास के अनुसार, बैरन द्वीप पर पहला विस्फोट 1787 में दर्ज किया गया था। इसके बाद:
- 1852 – दूसरा बड़ा विस्फोट
- 1991 – सबसे बड़ा recorded विस्फोट
- 2005, 2017, 2022 – हल्के विस्फोट
- 13 और 20 सितंबर 2025 – हाल ही में दो मध्यम विस्फोट हुए
इन विस्फोटों में लावा, राख और धुआं निकला, लेकिन कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ क्योंकि यह द्वीप निर्जन है।
हाल ही में क्या हुआ बैरन द्वीप पर?
सितंबर 2025 में 8 दिनों के अंदर दो बार ज्वालामुखी फटा। 13 और 20 सितंबर को हुए विस्फोटों में लावा और धुआं देखा गया। भारतीय नौसेना ने इसका वीडियो भी रिकॉर्ड किया, जिसमें ज्वालामुखी से लावा बहता हुआ दिख रहा है।
इस विस्फोट के बाद अंडमान क्षेत्र में 4.2 तीव्रता का भूकंप भी आया, लेकिन कोई खतरा नहीं हुआ।
बैरन द्वीप पर कौन-कौन से जीव रहते हैं?
चूंकि बैरन द्वीप भारत में स्थित एक सक्रिय ज्वालामुखी है, इसलिए यहाँ इंसान नहीं रहते। लेकिन कुछ जीव यहाँ पाए जाते हैं:
- बैरन कबूतर – एक दुर्लभ पक्षी
- बकरियाँ और चूहे – पुराने समय में छोड़े गए
- समुद्री जीव – आसपास के पानी में स्कूबा डाइविंग से देखे जा सकते हैं
1991 के विस्फोट में पक्षियों की कई प्रजातियाँ कम हो गई थीं।
बैरन द्वीप पर जाना क्यों मुश्किल है?
यह द्वीप एक संरक्षित क्षेत्र है। यहाँ पर्यटकों को जाने की अनुमति नहीं है। सिर्फ वैज्ञानिक और नौसेना के लोग ही यहाँ अध्ययन के लिए जाते हैं। यह द्वीप ज्वालामुखी अनुसंधान के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
बैरन द्वीप का वैज्ञानिक महत्व क्या है?
बैरन द्वीप भारत में स्थित एक सक्रिय ज्वालामुखी है, इसलिए यह वैज्ञानिकों के लिए एक natural laboratory की तरह है। यहाँ वे अध्ययन करते हैं:
- ज्वालामुखी कैसे फटता है
- मैग्मा की गति और तापमान
- टेक्टोनिक प्लेट्स की हलचल
- समुद्री जीवन पर असर
यहाँ के विस्फोट VEI 2 यानी मध्यम स्तर के होते हैं, जो लगातार लेकिन हल्के होते हैं।
बैरन द्वीप के आसपास क्या खास है?
इस द्वीप के आसपास का पानी दुनिया के top scuba diving sites में गिना जाता है। यहाँ आप देख सकते हैं:
- मानता रे मछली
- कोरल रीफ्स
- लावा से बनी चट्टानें
यह जगह adventure lovers के लिए एक hidden gem है, लेकिन आम लोगों को यहाँ जाने की अनुमति नहीं है।
क्या बैरन द्वीप भारत में स्थित एक सक्रिय ज्वालामुखी भविष्य में खतरा बन सकता है?
फिलहाल बैरन द्वीप के विस्फोट हल्के और नियंत्रित हैं। लेकिन अगर कभी बड़ा विस्फोट हुआ, तो:
- समुद्री जीवों को नुकसान हो सकता है
- आसपास के द्वीपों पर राख और धुआं फैल सकता है
- भूकंप की संभावना बढ़ सकती है
इसलिए भारतीय वैज्ञानिक और नौसेना लगातार इसकी निगरानी कर रहे हैं।
बैरन द्वीप से जुड़े जरूरी तथ्य
| तथ्य | जानकारी |
| स्थान | अंडमान सागर, भारत |
| दूरी पोर्ट ब्लेयर से | लगभग 140 किलोमीटर |
| ऊँचाई | 354 मीटर |
| क्षेत्रफल | 8.34 वर्ग किलोमीटर |
| पहला विस्फोट | 1787 |
| हालिया विस्फोट | 13 और 20 सितंबर 2025 |
| ज्वालामुखी प्रकार | Stratovolcano with pyroclastic cones |
| मानव निवास | नहीं |
| जीव-जंतु | पक्षी, बकरियाँ, चूहे |
| वैज्ञानिक उपयोग | ज्वालामुखी अध्ययन, टेक्टोनिक रिसर्च |
Sources:
निष्कर्ष
बैरन द्वीप भारत में स्थित एक सक्रिय ज्वालामुखी है, जो न सिर्फ भारत बल्कि पूरे दक्षिण एशिया का इकलौता ज्वालामुखी है। यह द्वीप वैज्ञानिकों के लिए एक research center है और students के लिए एक fascinating topic। यहाँ का इतिहास, भूगोल और विज्ञान सब कुछ मिलकर इसे एक अनोखी जगह बनाते हैं।
अगर आप 8th standard के student हैं और भारत के भूगोल या विज्ञान में रुचि रखते हैं, तो बैरन द्वीप का अध्ययन आपके लिए बहुत उपयोगी हो सकता है।