H1B वीज़ा संकट 2025

H1B वीज़ा संकट 2025: हजारों भारतीयों का भविष्य अधर में, अमेरिका लौटने की दौड़ शुरू

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Written by sarfarosh news

September 20, 2025

H1B वीज़ा संकट 2025 ने हजारों भारतीयों को एक ऐसी स्थिति में ला खड़ा किया है, जहां उनका करियर, परिवार और भविष्य एक ही झटके में खतरे में पड़ गया है। अमेरिका में काम कर रहे भारतीय टेक प्रोफेशनल्स, जो छुट्टियों, शादी या वीज़ा स्टैम्पिंग के लिए भारत आए थे, अब एक नई चुनौती का सामना कर रहे हैं — उन्हें 21 सितंबर 2025 से पहले अमेरिका लौटना होगा, वरना उन्हें फिर से एंट्री नहीं मिलेगी। यह संकट तब और गहरा हो गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H1B वीज़ा शुल्क को $100,000 तक बढ़ा दिया।

 क्या है H1B वीज़ा संकट 2025?

H1B वीज़ा अमेरिका का एक विशेष वीज़ा है जो विदेशी पेशेवरों को “स्पेशलिटी ऑक्यूपेशन” यानी तकनीकी और विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में काम करने की अनुमति देता है। भारत से हर साल हजारों लोग इस वीज़ा पर अमेरिका जाते हैं। लेकिन 2025 में अचानक आए बदलावों ने इस वीज़ा को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।

  • राष्ट्रपति ट्रंप ने एक नया आदेश जारी किया है जिसके तहत H1B वीज़ा धारकों को अमेरिका में प्रवेश के लिए $100,000 अतिरिक्त शुल्क देना होगा।
  • यह आदेश 21 सितंबर 2025 को सुबह 12:01 बजे से लागू होगा।
  • जो लोग उस समय तक अमेरिका नहीं लौट पाएंगे, उन्हें फिर से एंट्री नहीं मिलेगी — जब तक कंपनियां उनके लिए यह भारी शुल्क न भरें।

 कितने लोग प्रभावित हुए हैं?

श्रेणी अनुमानित संख्या स्थिति
भारत में फंसे H1B धारक 50,000+ अमेरिका लौटने की कोशिश में
वीज़ा स्टैम्पिंग के लिए आए 20,000+ प्रक्रिया अधूरी, समय कम
शादी/पारिवारिक कारणों से आए 10,000+ अचानक नियम बदलने से फंसे

 क्यों बढ़ा H1B वीज़ा संकट 2025?

Times Now की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि H1B वीज़ा का दुरुपयोग हो रहा है और अमेरिकी कर्मचारियों को सस्ते विदेशी श्रमिकों से प्रतिस्थापित किया जा रहा है। इसी कारण उन्होंने वीज़ा शुल्क को $100,000 तक बढ़ा दिया है।

  • पहले यह शुल्क $2,000 से $5,000 के बीच होता था।
  • अब यह सीधे $100,000 कर दिया गया है, जिससे कंपनियों पर भारी वित्तीय दबाव पड़ा है।
  • टेक कंपनियों जैसे Microsoft, Amazon, Meta, JPMorgan ने अपने कर्मचारियों को तुरंत अमेरिका लौटने की सलाह दी है।

 क्या डेडलाइन बढ़ सकती है?

  • अभी तक अमेरिकी प्रशासन ने डेडलाइन बढ़ाने को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
  • भारतीय समुदाय और टेक कंपनियां इस मुद्दे पर दबाव बना रही हैं।
  • अगर डेडलाइन नहीं बढ़ी, तो हजारों भारतीयों की नौकरियां और भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

H1B वीज़ा संकट 2025 को लेकर सोशल मीडिया पर भी चिंता और नाराज़गी देखी जा रही है।

“हमने अमेरिका में सालों मेहनत की, अब अचानक बाहर कर दिया जा रहा है।”
“इतना बड़ा शुल्क देना हर किसी के लिए संभव नहीं है।”
“सरकार को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।”

 कंपनियों की प्रतिक्रिया

  • Microsoft ने एक आंतरिक ईमेल में कहा: “H1B वीज़ा धारकों को अमेरिका में ही रहना चाहिए। H4 वीज़ा धारकों को भी अमेरिका में ही रहने की सलाह दी जाती है।”
  • JPMorgan ने भी अपने कर्मचारियों को तुरंत यात्रा करने की सलाह दी है।
  • Amazon, Meta, Apple, Google जैसी कंपनियों के हजारों कर्मचारी प्रभावित हुए हैं।

 एयरपोर्ट्स पर अफरा-तफरी

Mathrubhumi की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के एयरपोर्ट्स पर अचानक भीड़ बढ़ गई है। लोग अमेरिका लौटने की कोशिश में महंगे टिकट खरीदने को मजबूर हैं।

  • फ्लाइट्स की कीमतें 3 गुना तक बढ़ गई हैं।
  • कई लोग दुर्गा पूजा या पारिवारिक समारोहों के लिए भारत आए थे — अब वे अमेरिका लौटने की दौड़ में हैं।
  • लेकिन इतनी जल्दी फ्लाइट मिलना लगभग असंभव है।

 क्या विकल्प हैं?

H1B वीज़ा संकट 2025 के बीच कुछ लोग विकल्प तलाश रहे हैं:

  • कनाडा, UK या ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की ओर रुख करना।
  • रिमोट वर्क की सुविधा लेना — हालांकि यह भी सीमित है।
  • भारतीय सरकार से हस्तक्षेप की मांग करना ताकि अमेरिका से बातचीत हो सके।

🇮🇳 भारत सरकार की भूमिका

अब तक भारत सरकार ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन सोशल मीडिया पर लोग मांग कर रहे हैं कि विदेश मंत्रालय इस मुद्दे पर अमेरिका से बात करे।

“सरकार को इस संकट में अपने नागरिकों के साथ खड़ा होना चाहिए।”
“यह सिर्फ वीज़ा नहीं, हजारों परिवारों का भविष्य है।”

 निष्कर्ष

H1B वीज़ा संकट 2025 एक ऐसा मुद्दा बन गया है जो सिर्फ वीज़ा प्रक्रिया तक सीमित नहीं है — यह हजारों भारतीयों के सपनों, करियर और परिवार से जुड़ा है। अगर डेडलाइन नहीं बढ़ी, तो यह संकट और गहरा हो सकता है। टेक कंपनियों, सरकारों और समुदायों को मिलकर इस समस्या का समाधान निकालना होगा।

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